भारतीय समाज में भारतीय ज्ञान एवं परंपरा का समाजशास्त्रीय विश्लेषण

Authors

  • डॉ.रचना श्रीवास्तव प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष, समाजशास्त्र विभाग, शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रीवा (म.प्र.) Author
  • डॉ. विनीता सिंह सहायक प्राध्यापक, समाजशास्त्र, अक्षत महाविद्यालय, सतना (म.प्र.) Author

Keywords:

भारतीय समाज, भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति, समाजशास्त्रीय सिद्धांत, सामाजिक परिवर्तन, परंपरा एवं आधुनिकता।

Abstract

भारतीय समाज विश्व की प्राचीनतम और निरंतर विकसित होने वाली सभ्यताओं में से एक है। इसकी विशिष्टता भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित है, जिसमें वेद, उपनिषद, दर्शन, धर्म, लोक परंपराएँ, आचार-विचार, रीति-रिवाज, कला, संस्कृति और सामाजिक संस्थाएँ सम्मिलित हैं। भारतीय ज्ञान एवं परंपरा केवल धार्मिक या आध्यात्मिक संरचना तक सीमित न होकर समाज के संपूर्ण ढांचे—परिवार, विवाह, शिक्षा, अर्थव्यवस्था, राजनीति और नैतिक मूल्यों—को प्रभावित करती रही है।

इस शोध पत्र का उद्देश्य भारतीय समाज में विद्यमान भारतीय ज्ञान एवं परंपरा का समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से विश्लेषण करना है। अध्ययन में यह समझने का प्रयास किया गया है कि किस प्रकार पारंपरिक ज्ञान आधुनिक सामाजिक संरचनाओं के साथ सामंजस्य स्थापित करता है तथा सामाजिक परिवर्तन के दौर में इसकी भूमिका क्या है।

प्रस्तुत शोधसतना जिलेको अध्ययन क्षेत्र बनाकर किया गया है, जिसमें200 उत्तरदाताओंको सैंपल के रूप में चयनित किया गया। शोध में वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक पद्धति अपनाई गई है। प्राथमिक एवं द्वितीयक दोनों प्रकार के आंकड़ों का उपयोग किया गया।

शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि भारतीय ज्ञान परंपरा आज भी समाज में नैतिकता, सामाजिक एकता, पारिवारिक मूल्य और सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, यद्यपि वैश्वीकरण और पाश्चात्य प्रभावों के कारण इसमें परिवर्तन भी दृष्टिगोचर हो रहे हैं। यह अध्ययन नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों एवं समाजशास्त्रियों के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकता है।

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Published

23-01-2026

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Research Articles

How to Cite

[1]
डॉ.रचना श्रीवास्तव and डॉ. विनीता सिंह, “भारतीय समाज में भारतीय ज्ञान एवं परंपरा का समाजशास्त्रीय विश्लेषण”, Int J Sci Res Humanities and Social Sciences, vol. 2, no. 2, pp. 218–223, Jan. 2026, Accessed: Feb. 06, 2026. [Online]. Available: https://mail.ijsrhss.com/index.php/home/article/view/IJSRHSS252256